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कश्मीर से हटी तो असम में शुरू हुई धारा 370 लगाने की मांग, MLA अखिल गोगोई ने उठाया मुद्दा

अनुच्छेद 370 किसी राज्य को स्वायत्तता और राज्य के स्थायी निवासियों के लिए कानून बनाने की क्षमता के मामले में विशेष अधिकार देता है। कुछ साल पहले तक जम्मू-कश्मीर को यह विशेष दर्जा प्राप्त था।

2022 मई /04 PRJ न्यूज़ ब्यूरो

कार्यकर्ता और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने बुधवार को राज्य के मूल निवासियों की “संवैधानिक सुरक्षा” के लिए असम में अनुच्छेद 370 जैसे प्रावधान को लागू करने की मांग की। रायजर दल के अध्यक्ष ने कहा, “हमने केंद्र से राज्य के लोगों को संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए असम में अनुच्छेद 370 या 371 (ए), 371 (एफ) 371 (जे) जैसे प्रावधानों को लागू करने की मांग की है। अनुच्छेद 370 या 371 (ए) जैसे सुरक्षा उपायों को लागू किए जाने तक राज्य के मूलनिवासी सुरक्षित नहीं होंगे।”

अनुच्छेद 370 किसी राज्य को स्वायत्तता और राज्य के स्थायी निवासियों के लिए कानून बनाने की क्षमता के मामले में विशेष अधिकार देता है। कुछ साल पहले तक जम्मू-कश्मीर को यह विशेष दर्जा प्राप्त था।

वहीं अनुच्छेद 370 के अलावा अनुच्छेद 371 में कई राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। भारतीय संसद का कोई भी कानून नगालैंड के लोगों के सांस्कृतिक और धार्मिक मामलों में लागू नहीं होगा। नगा लोगों के प्रथागत कानूनों और परंपराओं को लेकर संसद का कानून और सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश लागू नहीं होगा। इसके अलावा नागालैंड की जमीन को गैर नागाओं को हस्तांतरित नहीं की जाएगा।

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) में शत-प्रतिशत संशोधन का विरोध करते हुए अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक ने कहा कि इसके बजाय आंशिक संशोधन पर होना चाहिए। गोगोई ने कहा, “एनआरसी का 100 प्रतिशत संशोधन अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक है। एनआरसी सिर्फ भाजपा के लिए एक मुद्दा है। उनके पास असम के मूल निवासियों को सुरक्षा देने का कोई एजेंडा नहीं है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और आरएसएस केवल हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहे हैं। विधायक ने कहा, “उनका एजेंडा भारत के संविधान, देश की विविधता के खिलाफ है। अल्पसंख्यक लोगों पर बार-बार हमला देश या लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले बहस होनी चाहिए।”

इसके अलावा, गोगोई ने कहा कि सरकार को राज्य के अपने मुसलमानों के विकास के लिए काम करना चाहिए, और “मुसलमानों को विभाजित नहीं करना चाहिए”। उन्होंने कहा, “हर कोई जानता है कि मूलनिवासी मुसलमान कौन हैं और प्रवासी मुसलमान कौन हैं। हम कोई विभाजन नहीं चाहते हैं

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