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ग्रहों की चाल-दशा के कारण 2022-2025 तक देश व विश्व को झेलना पड़ेगा प्राकृतिक त्रासदी :ज्योतिषाचार्य ब्रजेश मिश्र

सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।।

नई दिल्ली: वैसे तो माता की सवारी शेर है, पर नवरात्रि में उनके वाहन उनके आगमन के दिनों के अनुसार बदलते रहते हैं। हर साल नवरात्रि पर मां का आगमन और प्रस्थान विशेष वाहन पर होता है। देवी दुर्गा के आने और जाने वाले हर वाहन में भविष्य के लिए विशिष्ट संकेत छिपे होते हैं।

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शारदीय दुर्गा पूजा अंग्रेजी तिथि 7 अक्टूबर 2021से प्रारंभ हो रहा है और तिथि 15अक्टूबर 2021 तक मनाया जाएगा! इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन डोला पर एवं प्रस्थान (गज़) हाथी पर होगा। इसके फल स्वरुप संसार को अनेकानेक प्राकृतिक त्रासदी व समस्याओं का सामना करना होगा! गज़ पर माँ का प्रस्थान होने के कारण जल अधिकता का प्रभाव बना रहेगा। इस वर्ष देवी का कलश स्थापना चित्रा नक्षत्र में हो रहा है जो कि शुभ नहीं है देश ही नहीं पूरा विश्व मे समय अनुकूल नहीं होगा ।

देश ही नहीं पूरे विश्व में आने वाले वर्ष 2022 से 2025 त्रासदी भरा होगा भारत सहित पुरे विश्व में ग्रह की विपरीत चाल दशा से 2022 से 2025 तक नएरोगदि ( ज्वरादि रूप रोग उत्पन्न होगा )आदि जलीय आपदा,
दैविक प्रकोप, प्राकृतिक आपदाएं, भारी भूकंप ,आग ,कंपन ,चक्रवर्ती तूफान, भूस्खलन, आकाशीय वज्रपात ,हिंसात्मक गतिविधियां आतंकवादी घटनाएं, नामचीन व्यक्ति पर गंभीर संकट आदि फिल्मी दुनिया के सितारों के ऊपर संकट के बादल छाए रहेगा देश सहित पूरा विश्व त्रासदी भरा रहेगा

ग्रह की चाल दशा को देखते हुए तृतीय विश्व युद्ध का योग अक्टूबर 2021 से प्रारंभ होने की प्रबल संभावना देखी जारही है! भारत में बड़े स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल हो सकती है यह भी संभव है कि सत्ताधारी पार्टी के श्रीर्ष नेता व बड़े व्यक्ति को भी पद त्याग करना पड़ सकता है! देश में किसी बड़े राजनीतिज्ञों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देना पड़ सकता है। देश के कई राज्यों में हिंसात्मक घटनाएं हो सकती है और सरकार द्वारा सैन्य शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है जिससे कि देश में आपातकाल (इमरजेंसी) की स्थिति बन सकती है ,और जन धन की काफी क्षति हो सकती है!
शिशु बालकों को ज्वारदि रोग से क्षति होगी धार्मिक उन्माद, हिंसात्मक गतिविधियां बढ़ेगी और युद्धजनित परिस्थितियां बढ़ेगी वित्तीय संस्थानों की पूंजी में कमी आएगी ।भारत देश के कई राज्यों में स्थिति संकट पूर्ण होगी ।जिसमें हर स्तर पर संकट बना रहेगा। सरकार के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा जन आंदोलन में वृद्धि होगी! सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान इत्यादि होगा विपक्ष सरकार के हर नीतिगत फैसले का विरोध करेगी जो कि हमेशा खराब स्थिति बनी रहेगी! सरकार एवं विपक्ष की सहमति नहीं बनेगी जो एक उत्तरदायी विपक्ष की परंपरा के विपरीत होगी विपक्ष अपना विश्वास खो देगी आम जनमानस में विपक्ष मुद्दा विहीन होगी सीमाओ पर युद्ध जैसी परिस्थितियां एवं सैन्य संघर्ष संभव है देश में विदेशी और देशी निवेश बढ़ेगा और भारत की विदेश नीति पर दबाव बढ़ेगा देश में रक्षा बजट में काफी वृद्धि पर दबाव बढ़ेगा देश में रक्षा बजट में काफी विधि देखी जाएगी चिकित्सा सुविधाओं एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए कई सारे अंतरराष्ट्रीय समझौता करेगी । सुरक्षा के संबंधित सभी मानको पर सरकार बहुत तेजी से कार्य करेगी और देश की सुरक्षा सुदृढ होगी देश और पूरे विश्व में बेरोजगारी बढ़ेगी देश के कई प्रांतों में प्राकृतिक तांडव होगा और भारी भूकंप ,आगजनी ,बाढ, समुद्री तूफान ,भूस्खलन तापमान, चरम सीमा पर बैठेगी इत्यादि े बहुत ही सारे राज्यो प्रभावित होंगे देश में दिल्ली (केंद्र स्थल) उत्तर प्रदेश ,बिहार, कुछ राज्यों के क्षेत्रों में जनता में क्रोधत्व की स्थिति बढ़कर तोड़फोड़ इत्यादि जन धन की क्षति होगी। फसलों को भी प्राकृतिक आपदा से नुकसान होगा रुपए का मूल्य भी डॉलर के मुकाबले कम होगा क्रूड आयल के मूल्यों में भी वृद्धि होगी शेयर बाजार भी अस्थिरता होगी शेयर के मूल्यो तथा मुद्रा कोष में कमी होगी जनता से मदद ली जाएगी और बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होगा पूरे विश्व सहित भारत में नए रोगादि फैलने के पूरे आसार दिख रहे हैं लोगों में आरोग्यता में कमी तथा मृत्यु दरों में वृद्धि संभव है इस रोग का समाधान डॉक्टर और वैज्ञानिक के लिए समाधान खोजना मुश्किल होगा आवश्यकता वस्तुओं व सुविधाओं में कमी होगी ।महिलाओं के प्रति अत्याचार और अनैतिक कार्यों में वृद्धि होगी । बालकों के प्रति दुराचार में वृद्धि होगी। शासकों के समक्ष फैसले लेने के लिए कठिन परिस्थितियां उत्पन्न होगी ।देश के पूर्वोत्तर भागों में अशांति होगी और इसमें जन जीवन त्रस्त रहेगा। देश सहित पूरे विश्व में हवाई वाहन( वायु यान)की दुर्घटना होगी ग्रह का योग बन रहा है जलिय आपदा अथवा किसी खदान भयंकर हादसा से बहुत ही हानिकारक होगी और जन धन की क्षति होगी। देश के सत्ताधारी पार्टी के किसी शीर्ष नेता को पद का त्याग करना पड़ सकता है देश मे आने वाले वर्ष में प्रमुख शासक होंगे वो ब्राह्मण या राजपूत परिवार से होंगे ऐसा ग्रह का योग बन रहा है ।प्राकृतिक आपदा से जानवरों की भी भारी नुकसान हो सकता है, देश ही नहीं पूरा विश्व में, विश्व में किसी भी प्रमुख राष्ट्रो मे परिस्थितियां जन अनुकूल नहीं होगी और कष्टदायक होगी प्रमुख राष्ट्राध्यक्षो पर गंभीर आरोप लगाए जाएंगे। विश्व के कुछ हिस्सों में आपातकालीन स्थिति पैदा होगी और आपातकालीन व्यवस्था के विरुद्ध जन आंदोलन और असहयोग होगा विकसित राष्ट्रों पर ऋण भार बढ़ेगा। प्रमुख राष्ट्रो को मुद्रा विनियम पर प्रतिकूल होगी विश्व के कुछ प्रमुख राष्ट्रो के मध्य शांति वार्ता असफल होगी ।अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निर्यात में वृद्धि होगी, इसके साथ-साथ विश्व के प्रमुख देशों औद्योगिक देशों में व्यापार असंतुलन होगा। पूरे विश्व में राजनीतिक स्तर पर विशेष उतार-चढ़ाव होगी। ब्रिटेन ,अमेरिका, रूस ,आदि शक्तिशाली राष्ट्रो में आपसी तनाव व खिंचाव रहेगा चीन, अरब राष्ट्र, जापान, आदि की देशो इत्यादि में जन आंदोलन और जनता में रोष व्याप्त होगा देशों के बीच आपसी खिंचाव खीचतान बढ़ेगा और इस बजह से कुछ हिस्सों में युद्ध का वातावरण भी बनेगा। इस्लामिक राष्ट्रो संकट पूर्ण रहेगा इत्यादि जैसे अफगानिस्तान ,ईरान, इराक, सीरिया और तुर्की आदि में गृहयुद्ध जैसे हालात बनेंगे और शासकों के लिए स्थिति अंनुकूल नहीं होगी, पश्चिमी देशों में कहीं कहीं आंतरिक अशांति होगी, और यह भी संभव है कि दो देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़प होगी विश्व के किसी प्रमुख देश के प्रधान नेता के स्वास्थ्य में विशेष प्रतिकूलता होगी। हत्याकांड एवं दुर्घटनाऍ विशेष होगी विश्व के जो विशेष शक्तिशाली राष्ट्र हैं वहां पर आतंकवादी घटनाएं होगी और आतंकी घटनाओं से जनधन की हानि और जनता में भय व्याप्त होगी यूरोप के कई देशों में जनाक्रोश बढ़ेगा और सार्वजनिक संपत्ति की बहुत क्षति होगी। चीन, जापान ,रूस ,तिब्बत ,नेपाल, वर्मा, भारत आदि राष्ट्रो में भूकंप, भूस्खलन ,प्राकृतिक प्रकोप, दैविक प्रकोप ,आग ,समुद्री तूफान, आदि प्राकृतिकप्रकोप से तांडव होगा लोग व्याकुल रहेंगे। विश्व शांति बहुत ही निम्न स्थिति में जा सकती है श्रीलंका, कंवोडिया ,अफगानिस्तान, ईरान, अफ्रीका ,राष्ट्रों व रूस आदि में आंतरिक हालत बहुत ही दयनिय अथवा विषम परिस्थिति में होगी इन सब के अलावा जलवायु परिवर्तन भी बहुत प्रमुख विषय होगा 2022 में बड़े-बड़े बर्फ के चट्टानो के समुद्र में पिघलने से समुद्री जलस्तर बढ़ेगा। जलवायु परिवर्तन से तापमान अपना प्रचंड रूप दिखाएगा भारत सहित पूरे विश्व में!

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