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जातिसूचक कलेवा’ पहनने वालों को नहीं मिलेगी स्कूल में एंट्री, एक छात्र की जा चुकी है जान; जानिए पूरा मामला

थेनी जिला के सीईओ ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि छात्र कई जाति समूहों में बंटे होते हैं, इसलिए लंच ब्रेक के दौरान, खेल के समय और स्कूल के घंटों के दौरान उनके बीच एक अजीब सा वातावरण देखा जाता है।

2022मई /06 PRJ न्यूज़ ब्यूरो

अगर आप अपनी कलाई पर ‘जातिसूचक कलेवा’ पहनते हैं को फिर स्कूल में एंट्री नहीं मिलेगी। यह आदेश जारी किया है तमिलनाडु के थेनी जिला के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) ने। थेनी जिला सीईओ ने जिले के सभी स्कूल प्रधानाध्यापकों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि छात्र जाति पहचान का संकेत देने के लिए अपने हाथों पर रंगीन धागा न बांधें।

आदेश में कहा गया है कि शिक्षक छात्रों को चेतावनी दें कि जाति विभाजन को भड़काने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह पता चला है कि स्कूली छात्र अपने हाथों पर अलग-अलग रंगों के रिस्टबैंड (हाथ में बांधे जाने वाला धागा या कलेवा) पहनते हैं, जो उनकी जाति की पहचान को दर्शाते हैं। थेनी जिला के सीईओ ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि छात्र कई जाति समूहों में बंटे होते हैं, इसलिए लंच ब्रेक के दौरान, खेल के समय और स्कूल के घंटों के दौरान उनके बीच एक अजीब सा वातावरण देखा जाता है।

इसलिए विद्यार्थियों के हित में सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया जाता है कि वे इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दें और सुबह की प्रार्थना के दौरान इसकी जांच करें और छात्रों को सूचित करें और उन्हें चेतावनी दें कि जातिगत सांप्रदायिकता को भड़काने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

जाति का प्रतीक ‘कलेवा’ बांधे होने को लेकर हुए झगड़े के बाद छात्र की मौत

तिरुनेलवेली जिले के एक सरकारी स्कूल में एक छात्र के जाति का प्रतीक ‘कलेवा’ (हाथ में बांधे जाने वाला धागा) बांधे होने को लेकर तीन अन्य छात्रों से हुए झगड़े के बाद 12वीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। घटना के सिलसिले में दो शिक्षिकों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर तीन किशोरों (छात्रों) से पूछताछ की गई और उनके खिलाफ किशोर न्याय कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तिरुनेलवेली के पास स्थित अम्बासमुद्रम के एक सरकारी स्कूल की 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र ने 11वीं कक्षा के एक छात्र से कथित तौर पर पूछा कि वह कलेवा क्यों बांधे हुए है। इस बात को लेकर दोनों छात्रों के बीच स्कूल परिसर में झगड़ा हो गया और इसी दौरान 11वीं कक्षा के दो अन्य छात्र भी अपने सहपाठी का समर्थन करने लगे।

मृतक छात्र अति पिछड़ा समुदाय से था, जबकि 11वीं कक्षा का एक छात्र दलित है और बाकी दोनों छात्र दूसरे धर्म से संबंध रखते हैं। झगड़े के दौरान 17 वर्षीय छात्र पर ईंट से वार किया गया, जिससे उसके सिर और एक कान पर चोटें आईं। यह घटना 25 अप्रैल को हुई थी।

बाद में 12वीं कक्षा के छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 30 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद से इलाके में तनाव है और मृतक के परिजनों तथा ग्रामीणों ने न्याय की मांग करते हुए सड़क जाम कर दी। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्कूल प्रशासन से आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करने को कहा है।

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