Bihar

बिहार में खुलेंगे दो हजार कामन सर्विस सेंटर, दसवीं पास महिलाओं को मिलेगा रोजगार!

CSC in Bihar बिहार के शहरी निकायों में खुलेंगे दो हजार सीएससी महिलाएं करेंगी संचालन सरकार के साथ हुआ एकरारनामा वार्ड के लोगों को मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं हजारों महिलाओं को मिल सकेगा रोजगार बैंकिंग और वित्‍तीय सेवाएं भी मिलेंगी!

2021 सितम्बर 04/ PRJ News ब्युरो पटना,:

बिहार के शहरी निकायों में अगले दो सालों में करीब दो हजार कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) खोले जाएंगे। इसका संचालन शहरी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी, जिन्हें डिजी सखी के नाम से पुकारा जाएगा। दसवीं पास इन महिलाओं के समूह को प्रशिक्षित कर उन्हेंं कामन सर्विस सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। यह समूह अपने वार्ड में लोगों को कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएंगी। इसको लेकर शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग ने सीएससी ई गवर्नेन्स सॢवस इंडिया लिमिटेड के साथ एकरारनामा किया। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के निदेशक अरविन्द कुमार झा और सीएससी ई गवर्नेन्स सर्विस इंडिया लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट कृष्णा कुमार ने एकरारनामा (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

सीएससी में मिलेंगी ये सुविधाएं

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वार्ड स्तर पर रहने वाले दिव्यांग, वृद्ध, असहाय महिला-पुरुषों के साथ-साथ खाताधारकों का पैसा बायोमेट्रिक से निकालने में भी मदद करेंगी। इसके साथ सीएससी के माध्यम से  सभी दैनिक जीवन में उपयोगी सेवाएं भी प्रदान करेंगी। इसके अलावा विभिन्न तरह के सरकारी प्रमाण पत्रों के आवेदन, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, विभिन्न कंपनी की बीमा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा स्कीम के आवेदन, पैन एवं आधार कार्ड, बिजली बिल, गैस बुकिंग, ट्रेन टिकट, स्वास्थ सेवा आदि सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

उत्पादों को मिलेगा आनलाइन बाजार

इसके साथ स्वयं सहायता समूहों के द्वारा बनाये गए उत्पाद को भी सीएससी के माध्यम से ऑनलाइन ई कामर्स वेबसाइट पर बिजनेस प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के द्वारा राज्य में अब तक लगभग 24 हजार स्वयं सहायता समूह एवं उनके करीब आठ सौ एरिया लेवल फेडरेशन का गठन किया गया है। राज्य के सभी नगर निकायों में सिटी लाइवलीहुड सेंटर भी स्थापित किये जा रहे हैं। इस अवसर पर विभाग के अपर निदेशक उमाकांत पाण्डेय, संजीव पांडेय, राज्य परियोजना समन्वयक वेद प्रकाश दयाल आदि उपस्थित थे।

 

 

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