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BIHAR : बिहार के हर जिले में खुलेंगे ‘भूकंप क्लीनिक’, बिल्डर Earthquake का डर दिखा कर अब नहीं कर सकेंगे आपको गुमराह!

2022 नवंबर 17 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो:
ऐसा ही एक पहल पिछले दिनों बिहार में शुरू हुआ है. बिहार सरकार (Bihar Government) ने अब हर जिले में एक ‘भूकंप क्लीनिक’ (Earthquake Clinics) खोलने का फैसला किया है. बिहार की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में ‘भूकंप क्लीनिक’ खुल भी चुके हैं. भूकंप को लेकर बिहार को सेसमिक जोन-4 के तहत रखा गया है.

देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर भूकंप (Earthquake) के हल्के-फुल्के झटके आते ही रहते हैं. कभी-कभी भकूंप के जोरदार झटके भी आ जाते हैं, जिससे जानमाल को काफी नुकसान पहुंचता है. देश में भूकंप से ज्यादा नुकसान न पहुंचे, इसके लिए कई तरह के उपाए किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी अपने-अपने तरीके से पहल कर रही है. ऐसा ही एक पहल पिछले दिनों बिहार में शुरू हुआ है. बिहार सरकार (Bihar Government) ने अब हर जिले में एक ‘भूकंप क्लीनिक’ (Earthquake Clinics) खोलने का फैसला किया है. बिहार की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में ‘भूकंप क्लीनिक’ खुल भी चुके हैं.

भूकंप को लेकर बिहार को सेसमिक जोन-4 के तहत रखा गया है.

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बिहार में अगर 7.5 की तीव्रता का भूकंप आएगी तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

 

ऐसे में भूकंप क्लीनिक में एनडीआरएफ की टीमें भूकंप की मॉक ड्रिल कर लोगों को इसके खतरे से आगाह कर रही है. इसके साथ ही भूकंप से कैसे बचें, इसकी ट्रेनिंग भी देती है. भूंकप क्लीनिक में आप कैसे मकान बनाएं, भूंकप में क्षतिग्रस्त मकानों को दोबारा कैसे बनाएं और भूकंप के समय आप कैसे अपनी जान बचाएं जैसे महत्वपूर्ण सलाह दी जाती है.

बिहार में शुरू हुआ भूकंप क्लीनिक
इन भूंकप क्लीनिकों में एक पूर्ण मकान का निर्माण कराया गया है. इस क्लीनिक में दो तरह के मकान बनाए गए हैं. एक मकान ईंट और सीमेंट से बना है तो दूसरा बांस और फूस के साथ-साथ स्टील के चादर से बना है. इन दोनों मकान को एक ही परिसर में बनाया गया है. इन दोनों मकानों के अंदर ही लिखा गया है कि आप अपना मकान कैसे बनाएं कि भूकंप का कोई असर नहीं हो.

हर जिले में खुलेंगे एक भूकंप क्लीनिक
भूकंप क्लीनिक में इंजीनियर ईंट और सीमेंट से बने मकान के बारे में बताते हैं कि मकान का प्लींथ कैसे होना चाहिए, पीलर की गहराई कितनी होनी चाहिए, सरिया का साइज और इ्स्तेमाल कैसे किया जाए साथ ही वेंटिलेशन की व्यवस्था किस तरह होनी चाहिए. इसी तरह बांस के घरों के बारे में भी यहां बताया जाता है कि आप भूकंप के दौरान इसे कैसे सुरक्षित रखें और मकान बनाने का तरीका कैसा होना चाहिए.

बिहार में अगर 7.5 की तीव्रता का भूकंप आएगी तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

देश के कई हिस्सों में बिल्डरों के द्वारा भूकंप का डर दिखा कर अब मार्केटिंग भी होने लगी है.

भूकंप क्लीनिक में आपको यह सिखाया जाएगा
भूकंपरोधी मकानों का कंसल्टेंसी देने वाले सिविल इंजीनियर अनिल कुमार न्यूज -18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं. ‘भूकंप को लेकर पहले से भविष्यवाणी करने वाला कोई यंत्र अभी तक मेरे जानकारी में भारत में सामने नहीं आया है. हां, हमलोग सेसमिक जोन के आधार पर मकानों की मजबूती के लिए लोगों को सलाह और आगाह करते रहते हैं. बिहार को सेसमिक जोन-4 के तहत रखा गया है. अगर यहां 7.5 की तीव्रता का भूकंप आ जाए तो इससे भारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. ऐसे में मकान बनाते समय कई बातों का ख्याल रखना पड़ता है.’

कुलमिलाकर देश के कई हिस्सों में बिल्डरों के द्वारा भूकंप का डर दिखा कर अब मार्केटिंग भी होने लगी है. कई कंपनियों ने भूकंप अलार्म और भूकंप अलार्म सिस्टम नाम से गैजेट्स भी ऑनलाइन बेचने शुरू कर दिए हैं. इन कंपनियों का दावा है कि भूकंप के आने पर ये अलार्म बजने लगेंगे, जिससे सोते हुए लोग जागकर भाग सकते हैं. इसी तरह की भ्रामक जानकारियों से अब ‘भूंकप क्लीनिक’ लोगों को जागरूक करेगी. हालांकि, देश में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के आने के बाद इन भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई शुरू भी हो गई है.

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