Uttar Pradesh

देवरिया की पूजा के बनाए हैंडीक्राफ्ट की अमेरिका-जर्मनी में मांग

लोगों के ताने सहे, आज सैकड़ों महिलाओं को दे रही रोजगार

2022 सितंबर 15/PRJ न्यूज़ ब्यूरो:

देवरिया से 2 किमी दूर रामनाथ देवरिया में पूजा शाही कंपनी चलाती हैं। वहां महिलाएं क्रोशिया से कई पैटर्न बनाती हैं। विदेशों से मिले ऑर्डर के अनुसार काम किया जाता है। क्रोशिया से बनाए गए हैंडीक्राफ्ट को विदेशों में काफी पसंद किया जा रहा है। देवरिया जिले के सात ब्लॉक की महिलाएं विदेशों से मिले ऑर्डर को पूरा करती हैं।

2009 में जब इसकी शुरुआत की तब कल्पना भी नहीं की थी कि कोई कंपनी चला सकूंगी। दूर-दूर तक इससे कोई नाता नहीं था। बस यही सोचती कि कुछ करना है। गांव की कुछ महिलाओं के साथ शुरू किए गए स्टार्टअप का टर्नओवर आज लाखों में है। अनपढ़ महिलाओं के बनाए हैंडीक्राफ्ट अब अमेरिका और जर्मनी भेजे जा रहे हैं। जिस क्रोशिया आर्ट को दादी-नानी के समय का आर्ट कहते हैं वह अब ग्लोबल हो गया है। विदेशों में इसकी काफी मांग है। इसने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। ये कहना है उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव की रहने वाली पूजा शाही का। जानिए, गांव में रहने वाली पूजा की कामयाबी की कहानी, उन्हीं की जुबानी:

मैं गांव के ही प्राइमरी स्कूल में पढ़ी। मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था। किसी तरह इंटर तक पढ़ाई की। बचपन से ही मां को क्रोशिया से तरह-तरह की चीजें बनाती देखती और उनसे बहुत प्रेरित होती। धीरे-धीरे क्रोशिया पर मेरा भी हाथ चलने लगा। मैं भी साड़ी वर्क करने लगी। मैंने यह सोचना शुरू कर दिया कि पढ़ाई-लिखाई में रुचि है नहीं, तो क्यों न इस आर्ट से ही स्टार्टअप किया जाए।

हुनर को बिजनेस का रूप दिया

ये इतना आसान नहीं था। गांव शहर की ओर बढ़ तो रहा है, लेकिन आधा-अधूरा। गांव में जब लड़कियां मैट्रिक-इंटर तक की पढ़ाई कर लेती हैं तो परिवार के लोग कहते हैं कि कुछ कर लो, सिलाई-बुनाई या कढ़ाई सीख लो… यही आगे चलकर काम आएगा। लड़कियां क्या करें, जो हुनर मां या दादी को आता है वही सीख लेती हैं। लेकिन मैं यह सोचती थी कि दादी क्रोशिया से डेकोरेटिव आइटम्स बना सकती हैं तो क्या इसे बेच नहीं सकतीं?

दो लोग कमाते हैं, आठ खाते हैं, अब यह नहीं चलेगा

मैंने एक छोटा सा सर्वे किया और पाया कि जितनी महिलाएं शहर में सुसाइड नहीं करतीं उतना गांव में करती हैं। उनका मेंटल हेल्थ सही नहीं होता। सुबह होते के साथ वो काम में जुट जाती हैं। घर की साफ-सफाई, खाना बनाना, बर्तन मांजना, पति और बच्चों को देखना… सुबह से रात तक वो काम करती हैं। उन्हें अपने लिए समय नहीं मिल पाता। इधर-उधर की बातें होती हैं। तब मैंने सोचा कि अगर ये महिलाएं बिजी हो जाएं और पैसे का महत्व समझें, तो इनकी किस्मत बदल सकती है। महिलाओं को रोजगार मिलेगा तो घर की रोजमर्रा की चीजों का खर्च उठा सकेंगी।

अंधेरे में तीर मारा और निशाने पर लग गया

घर पर बैठकर महिलाएं पैसे कमाएं, इस पर मंथन शुरू किया। मैं स्कूल-कॉलेज और अलग-अलग संस्थानों में जाती। हैंडीक्राफ्ट दिखाती और फिर ऑर्डर लेती। जो काम मिलता, उससे मिले पैसों को हम आपस में बांट लेते। क्रोशिया के बने सॉफ्ट टॉयज, एक्सेसरीज, ज्वेलरी, होम डेकोरेटिव आइटम्स आदि बनाने शुरू किए। बच्चों का पालना, झूला से लेकर सोफा कवर, टीवी कवर आदि पहले से बना रही थी। धीरे-धीरे हमारे प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ने लगी। मिरर वॉल हैंगर, फोटो फ्रेम, कर्टेन, मैट कवर, बॉटल होल्डर, पर्स की मांग बढ़ गई। लेकिन मार्केटिंग क्या है, कैसे अपने प्रोडक्ट्स बेचेंगे, इस पर 2014 में मदद की ‘जागृति यात्रा’ नाम की एक संस्था ने।

अमेरिका और जर्मनी से आते हैं ऑर्डर

इस संस्था की मदद से बहुत कुछ सीखने को मिला। इसके बाद मैंने ‘देवरिया डिजाइन’ नाम से कंपनी की शुरुआती की। हालांकि बाद में यह ‘अर्जन क्राफ्ट’ हो गया। आज मेरी कंपनी 100 से अधिक डेकोरेटिव आइटम्स और क्रोशिया प्रोडक्ट बनाती है। 50 से अधिक ज्वेलरी और एक्सेसरीज तैयार करती है। अमेरिका और जर्मनी में ये प्रोडक्ट्स पहुंचाए जा रहे हैं। कई दूसरे देशों से भी इन प्रोडक्ट्स के बारे में जानकारी मांगी जाती है।

13 वर्षों में 35 हजार महिलाओं को ट्रेनिंग दी

अब तक 35 हजार महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। कोरोना काल में हमने महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट की डिजाइन और तकनीक के बारे में ट्रेनिंग दी। मेरी कंपनी से 200 महिलाओं को सीधे रोजगार मिला। कई विदेशी कंपनियों ने ऑर्डर के लिए संपर्क किया है। इन्हीं में से एक वॉल मार्ट है। मार्च 2023 तक वॉल मार्ट से ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। 3 लाख पंपकिन बनाने के लिए 10 हजार महिलाएं काम करेंगी। मेरा लक्ष्य है कि तीन सालों में स्थायी रूप से कंपनी में 10 हजार महिलाएं काम करें।

देवरिया डिजाइन को चुना गया ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’

हमारी टीम की मेहनत रंग लाई। देवरिया डिजाइन को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ चुना गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे ‘देवी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने हमारे काम को काफी सराहा। जैसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ उनका ड्रीम रहा है, उसी तरह मैं देवरिया को हैंडीक्राफ्ट से पहचान दिलाने की कोशिश में जुटी हूं।

जो गलत निगाह से देखते थे, अब वह भी गर्व महसूस करते हैं

यहां तक का सफर तय करना आसान नहीं रहा। जब हैंडीक्राफ्ट के लिए घर से बाहर जाती तो लोग तरह-तरह की बातें करते। जब ‘जागृति यात्रा’ के जरिए कौशल विकास के लिए मुंबई गई, तब लोगों ने कहा कि पूजा शाही कहीं चली गई। मेरे पापा को बहुत टॉर्चर सहना पड़ा। बड़े भाई ने भी सपोर्ट नहीं किया। आर्थिक रूप से तंगी थी ही। बावजूद इसके मैंने पापा से कहा कि मुझे अपनी जिंदगी में भरोसा दे दीजिए। हमें कुछ नहीं चाहिए, एक पैसा नहीं। तब पापा ने कहा कि जाओ, घर की इज्जत तुम्हारे हाथ में है। तुम सच्चाई पर रहोगी तो सब ठीक होगा। मैं इस पर खरी उतरी। मुझे हमेशा यही लगता था कि सफल नहीं हुई तो लोग पापा को जीने नहीं देंगे। पहले जो लोग गलत निगाह से देखते थे, वह भी आज गर्व महसूस करते हैं। आज मेरे परिवार के लोग मेरे हैंडीक्राफ्ट के काम से जुड़े हैं।

मेरी सास हैं कंपनी में पार्टनर

2019 में मेरी शादी हुई। मेरी ससुराल छत्तीसगढ़ में है। मेरी सास मेरी कंपनी में पार्टनर हैं। वह मेरी सास कम, दोस्त अधिक हैं। पति कंप्यूटर इंजीनियर हैं। उन्होंने मेरे काम को हमेशा प्रमोट किया है।

गांव की महिलाओं की जिंदगी बदली

हम ऐसी महिलाओं के साथ काम करते हैं जिन्हें सही मायनों में काम की जरूरत होती है। ऐसी महिलाएं जो प्रताड़ित हैं, जिनके पति नहीं हैं, जिन्हें बच्चों को पढ़ाना है, उन्हें मैं अपनी कंपनी से जोड़ती हूं। ऐसी सैकड़ों महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। मैं यही कहना चाहती हूं कि आपका विजन स्पष्ट होना चाहिए। आप जीवन में क्या करना चाहती हैं यह आप तय कर लें। एक बार तय कर लिया तो फिर कामयाबी जरूर मिलती है।

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