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पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती विकास की अहम घटना हुई थी हवा में !

पृथ्वी (Earth) पर जीवन की शुरुआत से संबंधित अध्ययन में पाया गया है कि उस समय के रासायनिक क्रियाएं (Chemical Reactions) पानी के अंदर नहीं हुई थी. इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने पाया है कि शुरुआती जीवन के पनपने से संबंधित

2022 अक्टूबर 11 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो :

पृथ्वी पर जीवन (Life on Earth) की शुरुआत महासागरों के उथले पानी या छोटे  गर्म पानी के तालाब में हुई मानी जाती है. माना जाता है कि पृथ्वी पर जैविक प्रतिक्रियाओं के पूरा करने में पानी का मुख्य भूमिका रह थी.  फिर भी मूल घटकों (Basic Ingredients of life) का निर्माण केवल पानी वाले वातावरण में होना संभव नहीं था जिससे सवाल उठा कि आखिर जीवन के आरंभिक स्वरूप की शुरुआत कैसे हुई. नए अध्ययन ने खुलासा किया है कि ये संवेदनशील लेकिन अहम रासायनिक प्रतिक्रियाएं (Initial Chemical Reactions) कहां और कैसे हुई होंगी. इस अध्ययन में हुए प्रयोग में शोधकर्ताओं ने बताया है कि उस समय अमीनों एसिड की शृंखलाओं में पानी नहीं बल्कि बल्कि हवा का बड़ा योगदान था.

अमाइड बॉन्ड की कड़ियां
अमाइड बॉन्ड वह कड़ियां होती हैं जो अमीनों एसीड की शृंखलाओं में जीवन के कई प्रमुख घटकों का प्रमुख आधार बनाती हैं जिसमें पेप्टाइड और प्रोटीन भी शामिल होती हैं, पेप्टाइड मीनों एसिड की छोटे तंतु होते हैं, तो वहीं प्रोटनीन अमीनों एसिड की लंबे तंतु होते हैं जो एंजाइम के तौर पर काम करते हैं. समस्या इन्हीं एमाइड बंध के साथ है.

पानी और अमाइड बॉन्ड
अमाइड बॉन्ड पानी में अच्छे से काम नहीं कर पराते हैं इसीलिए इनका पुरातन महासागरों के पानी के अंदर पनपना या प्रतिक्रियाएं करना संभव नहीं है. इसका मतलब है कि कुछ और ही कारक था जिसने जीवन पनपने की प्रक्रियाओं को चलाया होगा.  नए अध्ययन में सुझाया गया है कि ऐसा जादू पानी की सतह यानी पानी और हवा के बीच की परत में हो पाया होगा.

विशेष प्रतिक्रियाशीलता
शोधपत्र में पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के कैमिस्ट डायलन होल्डेना ने बताया कि उनकी टीम ने फ्री अमीनो एसिड की विशेष प्रतिक्रियाशीलता पाई है जो हवा और पानी के बीच की परत में सूक्ष्म आकार के पानी की बूंदें पर होती है जिससे मिलीसेकेंड के समयावधि में ही पेप्टाइड आइसोमर का निर्माण हो जाता है.

क्या प्रयोग किया शोधकर्ताओं ने
यह प्रतिक्रिया आसपास की हालात के साथ ही हुआ था और उसके लिए किसी तरह के रिएजेंट, एसिड, विकिरण या उत्प्रेरक की जरूरत नहीं पड़ी थी. टीम ने पानी की सूक्ष्म बूंदों को दो अमीनों एसिड, ग्लायसीन और एल एलानाइन पर छिड़का जो एक मास स्पैक्ट्रोमीटर उपकरण में विस्तृत रासायनिक विश्लेषण के लिए रखे थे.

क्या हुआ होगा शुरुआती जीवन के समय
इन बूंदों पर एक डाइपेप्टाइड अमीनो एसिड की शृंखला बन गई. चूंकि डाइपेप्टाइड अमीनो एसीड की और भी शृंखला बना सकते हैं. इससे यह साफ हुआ की शुरुआती पेप्टाइड शृंखलाएं जो बनी होंगी उनका सामना अमीनो एसीड में घुली हवा में सूक्ष्म बूंदों से हुआ होगा. अरबों साल पहले इस तरह की सूक्ष्म बूंदें समुद्री स्प्रे के तौर पर महासागरों में बनी होंगी जिससे जीवन के विकास के लिए जरूरी रासायनिक बॉन्ड विकसित हो सकें.

अरबों साल पहले होने की संभावना
खास बात यह रही कि प्रयोगों में जो प्रतिक्रियाएं अवलोकित की गई उनमें किसी भी तरह के एजेंट, उत्प्रेरक, या विकिरण स्रोत जैसा कारक नहीं था.  इससे इस बात की संभावना और भी ज्यादा प्रबल हो जाती हैकि यह अरबो साल पहले पृथ्वी पर भी हुए होंगे इसकी बहुत ज्यादा गुंजाइश है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अवलोकित पेप्टाइड की पीढ़ी पानी-हवा के बीच की सतह पर शुद्ध पानी की बूंदों पर फ्री अमीनो एसिड से बनी है वह सभी प्रीबायोटक तंत्रों में सबसे सरतलम है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि वायुमंडलीय एरोसॉल या फिर समुद्री स्प्रे जैसी स्थितियों ने एक खास तरह का वातावरण बनाया होगा. अगर शोधकर्ता सही हैं तो जहां पानी की सूक्ष्म बूंदें हवा से टकराती हैं वहां के न्यूनतम पैमाने का वातावरण नम की जगह सूखा होना चाहिए जिससे डाइपेप्टाइड के संश्लेषण के हालात बन सकें. वैज्ञानिक अब इन स्थितियों को पैदा करने वाले अन्य हालात जैसे, हाइड्रोथर्मल वेंट या क्षुद्रग्रह के टकराव आदि का भी अध्ययन कर रहे हैं.

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