Bihar

नीतीश की पार्टी से BJP को चेतावनी, जातिगत जनगणना की मांग नहीं मानी तो टकराव होगा : कुशवाहा

2021 अगस्त 26/PRJ News ब्युरो/पटना:

जातिगत जनगणना (Caste Census) की मांग को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के दो दिनों बाद वरिष्ठ जनता दल (यू) नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने बीते बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी भले ही एनडीए का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती है तो ‘टकराव’ निश्चित तौर पर होगा. गैर-राजनीतिक फोरम ‘सोशलिस्ट थिंकर्स’ द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में जद (यू) संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष कुशवाहा ने कहा कि जातिगत जनगणना की अनुमति नहीं देना ‘बेईमानी’ होगी. खासकर तब जबकि 2010 में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान पार्लियामेंट ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया था और एनडीए सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान भी केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा इस बारे में आश्वस्त किया गया था.कुशवाहा ने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद को पिछड़े समुदाय का बताया था तब हम बहुत गौरवान्वित हुए थे. हम उम्मीद करते हैं कि वह (पीएम) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जातिगत जनगणना की मांग पर विचार करेंगे. भले ही हम एनडीए का हिस्सा हैं, लेकिन यदि मांग पूरी नहीं हुई तो टकराव तो होगा.” उन्होंने सवाल किये कि जब सभी दल इस पर एकमत हैं और कुछ भाजपा नेता भी इसकी मांग कर रहे हैं तो आखिर केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना की अनुमति देने से किसने रोक रखा है.

आंकड़े कहां हैं?कुशवाहा ने कहा कि कुछ लोग कह सकते हैं कि ओबीसी की कुछ प्रमुख जातियां, जैसे- कोइरी, कुर्मी और यादव- ने ओबीसी आरक्षण का सबसे अधिक लाभ उठाया है. उन्होंने कहा, “यह सच हो भी सकता है, लेकिन किस आधार पर लोग ऐसा कह रहे हैं. आंकड़े कहां हैं? यदि ऐसा है, तो हम आरक्षण का लाभ छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन पहले यह जानने के लिए जनगणना तो हो.”  जद (यू) के उपाध्यक्ष जितेन्द्र नाथ ने कहा, “यह कहना उचित नहीं होगा कि समाज में टकराव नहीं होगा. टकराव तो होता है, लेकिन संघर्ष और टकराव के बिना कुछ मिलता भी नहीं. यह समस्या तब शुरू हुई, जब जन्म के आधार पर जाति का निर्धारण किया गया.

 

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