Bihar

BIHAR : किडनी निकालने वाला डॉक्टर मुजफ्फरपुर से भूटान भागा – बिना MBBS की डिग्री के कर रहा था ऑपरेशन

2022 अक्टूबर 10 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो,बिहार :

मुजफ्फरपुर में 33 साल की सुनीता की दोनों किडनी निकालने वाला डॉक्टर देश छोड़कर भूटान फरार हो गया है। मामले की जांच कर रहे डीएसपी मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि दूसरा आरोपी भी बिहार के बाहर है। वो बार-बार अपना मोबाइल नंबर भी बदल रहा है। वहीं सूत्रों के मुताबिक फिलहाल वो पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ है। एक महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ इस मामले में खाली हैं। कार्रवाई के नाम पर आरोपी के क्लिनिक पर एक छोटा सा ताला लगा दिया गया है।

मामले की अगुआई कर रहे मुजफ्फरपुर पूर्व के डीएसपी मनोज कुमार पांडेय ने  बताया कि कार्रवाई के लिए तीन अलग-अलग टीम बनाई गई हैं। इसमें टेक्निकल सेल की भी मदद ली गई है। बाकी रटा-रटाया जवाब छापेमारी जारी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट की अपील की गई है। बहुत जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

आरोपियों के किडनी के कारोबार से जुड़े होने के सवाल से भी वे इनकार करते हैं। मनोज पांडेय ने बताया कि अभी तक इसके कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं। पवन कुमार पर पहले भी एक केस दर्ज होने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि उस मामले को शांत कर लिया गया था। मामले की पड़ताल करने के लिए पत्रकार  बरियापुर गांव पहुंचा, पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट…

पत्रकार  ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। मुजफ्फरपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सकरा थाना के बरियारपुर में पिछले 3 साल से पवन नाम का ये झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहा था। उसके पास एमबीबीएस की कोई डिग्री नहीं थी फिर भी वो प्रिस्क्रिपशन पर अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाता था। अपने प्रिस्क्रिपशन पर वह दावा करता था कि उसके शुभकांत क्लिनिक में हार्ट, आर्थो और पेट से जुड़े कई मेजर ऑपरेशन किए जाते हैं।

इसी शुभकांत क्लिनिक में आरोपी झोलाछाप डॉ. पवन हर महीने 2-3 ऑपरेशन करता था।
इसी शुभकांत क्लिनिक में आरोपी झोलाछाप डॉ. पवन हर महीने 2-3 ऑपरेशन करता था।

उस क्लिनिक को जान लीजिए जहां 3 साल से मेजर सर्जरी की जा रही थी

जिस क्लिनिक में वो ऑपरेशन करता था वह धान के खेत के बीच में है। आगे एक दर्जन मवेशी बंधे रहते हैं। चारों तरफ कचरा फैला हुआ है। छत के नाम पर टूटी एस्बेस्टस है। यहां न पंखे की व्यवस्था है, न पीने के साफ पानी की। हालात ये हैं कि मेडिकल के बेसिक इक्विपमेंट भी यहां नहीं है। चौकी पर मेजर सर्जरी की जा रही थी। स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले तीन साल से इसी जगह पर ये न केवल लोगों को सर्दी और बुखार का इलाज करता था बल्कि कई मेजर सर्जरी भी करता था। स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

ये उस शुभकांत क्लिनिक की पर्ची है जिसमें वो मेजर सर्जरी करने का दावा करता था।
ये उस शुभकांत क्लिनिक की पर्ची है जिसमें वो मेजर सर्जरी करने का दावा करता था।

सीएस ने भी माना इस क्लिनिक में बेसिक इलाज भी संभव नहीं

यह सब कुछ थाने से 500 मीटर की दूरी पर हो रहा था लेकिन इसकी खबर न पुलिस को लगी न स्वास्थ्य विभाग को। जब किडनी कांड का मामला सामने आया तब स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस क्लिनिक में पहुंचे। उनके मुताबिक इस क्लिनिक में सर्जरी क्या मामूली रूप से बीमार का इलाज कराना भी संभव नहीं है।

कागज पर कार्रवाई, झोलाछाप डॉक्टर बिना डर के चला रहे हैं क्लिनिक

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन यूसी शर्मा ने बताया कि किडनी कांड के बाद झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इस मामले में एक भी केस दर्ज नहीं किया गया है। उनका दावा है कि विभिन्न प्रखंडों में 130 क्लिनिक को बंद किया है।  इसकी पड़ताल करने के लिए सकरा के बगल में स्थित मुशहरी प्रखंड के विभिन्न गांवों में पड़ताल की तो यहां अभी भी झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से अपनी क्लिनिक बिना किसी डर के संचालित कर रहे हैं।

कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टर की ली थी मदद।
कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप डॉक्टर की ली थी मदद।

बड़े-बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर

ये झोलाछाप डॉक्टर केवल क्लिनिक ही नहीं चला रहे हैं, बल्कि इनके यहां गालब्लेडर में पथरी, बच्चादानी निकालने और हर्निया जैसे ऑपरेशन भी ये खुद ही करने लगे हैं। ये सीधे-सीधे लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे है, लेकिन इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन पर गाहे-बगाहे कार्रवाई होती भी है, लेकिन कुछ ही समय बाद ये फिर से शुरू हो जाते हैं।

बिहार में झोलाछाप डॉक्टर सिस्टम की मजबूरी, विभाग देता रहा है जिम्मेदारी

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था इन झोलाछाप पर इस कदर निर्भर है कि सरकार अगर सख्ती से इन पर पाबंदी लगा दें, तो पूरी व्यवस्था ही चरमराने लगेगी। झोलाछाप डॉक्टरों का अस्तित्व बिहार में एक खुला हुआ रहस्य है। वे जो काम कर रहे हैं, वह कानूनन गलत है, लेकिन सरकार के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है इसलिए इन्हें नजरअंदाज करके चलने दिया जाता है।

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