Bihar

नीतीश का तीर–लालन को कमान!

ललन सिंह बने जेडीयू के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लगी मुहर, अध्यक्ष पद से RCP ने दिया इस्तीफा

2021 जुलाई 31 / PRJ News ब्यूरो / पटना:

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक में नाराज ललन सिंह को मनाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया! गौरतलब हो कि नीतीश कुमार पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से ही अपनी पार्टी के आधार को मजबूत बनाने की जीतोड कोशिश में लगे हैं. इसमें उनके प्रमुख अस्त्र ललन सिंह ही रहे हैं! बिहार में लोजपा के एकमात्र विधाय़क राजकुमार सिंह अगर जेडीयू में शामिल हो गये तो ललन सिंह ने ही मुख्य भूमिका निभायी. चिराग पासवान से बदला चुकाने के लिए जब लोजपा को तोड़ा गया तो भी ललन सिंह ही सारा खेल संभाल रहे थे. ऐसे में अगर ललन सिंह नाराज हो जाते तो नीतीश कुमार के भविष्य के इरादों पर पानी फिर जाना तय था! वहीं नाराज ललन सिंह नीतीश कुमार को क्या क्षति पहुंचा सकते हैं ये सियासी जानकार जानते हैं. लिहाजा एक तरीके से ललन सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना नीतीश कुमार के लिए मजबूरी बन गयी थी।

जदयू के प्रमुख नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद ललन सिंह समता पार्टी के जमाने से उनके साथ हैं। जदयू में स्थापना काल से वे जुड़े रहे तथा लम्बा सांगठनिक अनुभव उनके साथ है। बिहार की सत्ता में पिछले 16 साल से काबिज जदयू के बिजेन्द्र प्रसाद यादव के बाद वे दूसरे प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। दिसम्बर 2005 से फरवरी 2010 तक करीब सवा चार साल प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने में काम किया है। जदयू के संगठन के साथ ही प्रदेश की सरकार तक में महत्वपूर्ण भूमिकाओं को मजबूती से निभाया है।

बिहार में लालू यादव के राजनीतिक बर्चस्व को तोड़ने में उनकी भूमिका इस मायने में महत्वपूर्ण मानी जाती है कि उन्होंने लालू के खिलाफ चारा घोटाले का मामला कोर्ट तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। बिहार विधान परिषद, राज्यसभा और अब तीसरी बार मुंगेर से लोकसभा पहुंचे ललन सिंह की गिनती जदयू के कद्दावर नेता के रूप में होती है। जदयू के वे पांचवें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। स्व. जार्ज फर्णांडिस, शरद यादव, नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह के बाद उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गयी है।

नीतीश कुमार द्वारा ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपे जाने के कयास पहले से ही लगाये जा रहे थे। दरअसल जुलाई माह के आरंभ केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जदयू के दो नेताओं के नाम प्रमुखता से उछल रहे थे। आरसीपी सिंह के मंत्री बनने तथा उसके बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाए जाने से इसे और बल मिला था।

शनिवार को इस बैठक में शामिल होने जब नीतीश कुमार अपने दिल्ली स्थित 6 कामराज लेन से एक ही गाड़ी में ललन सिंह और आरसीपी सिंह के साथ निकले तो यह पक्का हो गया कि नीतीश कुमार ललन सिंह को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का जिम्मा सौंपने जा रहे हैं। बहरहाल ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर जदयू ने एक सवर्ण चेहरे को आगे करके एक बड़ा संदेश भी देने की कोशिश की है। इसे जदयू द्वारा सामाजिक समीकरण को दुरुस्त करने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

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