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नासा ने मंगल ग्रह पर कर लिया ऑक्सीजन का जुगाड़

2022 सितंबर 08/PRJ न्यूज़ ब्यूरो:

नासा के इस उपकरण का नाम Moxie है जो मंगल ग्रह की कार्बनडाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बना रहा है। इससे उतना ऑक्सीन बनता है जितना एक छोटा पेड़ बनाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मंगल ग्रह पर जाने वाले मनुष्यों से पहले Moxie के बड़े संस्करण को वहां भेजा जाना चाहिए। जो सैकड़ों पेड़ों की क्षमता के बराबर ऑक्सीजन बना सकें।

इंसान मंगल ग्रह पर जाना चाहता है और वहां पर अपनी कॉलोनी बसाना चाहता है। लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल वहां हवा का न होना है। क्योंकि जीने के लिए ऑक्सीजन चाहिए और इसे पृथ्वी से ले जाना होगा। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि मंगल पर धरती से ऑक्सीजन ले जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि नासा का टिफिन बॉक्स के आकार का एक यंत्र मंगल पर ऑक्सीजन बनाने में सफल हुआ है। नासा के इस उपकरण का नाम Mo&ie है जो मंगल ग्रह की कार्बनडाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बना रहा है।

इससे उतना ऑक्सीन बनता है जितना एक छोटा पेड़ बनाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मंगल ग्रह पर जाने वाले मनुष्यों से पहले Mo&ie के बड़े संस्करण को वहां भेजा जाना चाहिए। जो सैकड़ों पेड़ों की क्षमता के बराबर ऑक्सीजन बना सकें। Mo&ie नासा के पर्सीवरेंस रोवर मिशन के तहत मंगल ग्रह पर पहुंचा था।

एक अध्याय में शोधकर्ताओं की रिपोर्ट कहती है कि 2021 के अंत तक मोक्सी दिन और रात के दौरान अलग अलग तरह की सात परिस्थितियों में ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम था।

कितना ऑक्सीजन बनाता है Mo&ie : हर टेस्ट के दौरान ये 6 ग्राम ऑक्सीजन प्रति घंटा बनाने के लक्ष्य में कामयाब रहा। धरती पर मौजूद ये एक छोटे पेड़ के बराबर ऑक्सीजन है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि पूरी क्षमता के साथ ये सिस्टम मनुष्यों के मंगल पर पहुंचने के बाद उन्हें जीवित रखने जितना ऑक्सीजन बना सकता है।

किसी भी मौसम में बन सकता है ऑक्सीजन : मंगल पर मौजूद इस उपकरण का वर्जन पर्सीवरेंस रोवर में फिट होने के लिए छोटा डिजाइन किया गया था। छोटी अवधि के लिए चलने के लिए इसे डिजाइन किया गया है। एक फुल स्केल ऑक्सीजन फैक्ट्री हर समय चलती रहेगी। इस उपकरण ने साबित किया है कि किसी भी मौसम में ये मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन बनाने में सक्षम है।

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