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घर और ऑफिस में एक जैसे गणपति स्थापित ना करें !

घर में सिद्धि विनायक, ऑफिस और दुकानों में विघ्नेश्वर तो कारखानों में हो महागणपति की स्थापना

2022 अगस्त 28 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो :

31 अगस्त से गणेश उत्सव शुरू हो रहा है। इस दिन घर-घर गणपति विराजेंगे। आमतौर पर लोग घर, दुकान, ऑफिस और फैक्ट्रियों में गणपति की एक जैसी ही मूर्तियां स्थापित करते हैं। धर्मग्रंथ और वास्तु दोनों का कहना है कि घर और वर्किंग प्लेस दोनों में एक जैसी प्रतिमाएं रखना ठीक नहीं है।

अब पहले गणेश जी की ये 3 तस्वीरें देखिए…

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पहली तस्वीर गणेश जी के सिद्धि विनायक रूप की है। दूसरी विघ्नेश्वर और तीसरे फोटो में महागणपति हैं…

सिद्धि विनायक रूप की मूर्ति घर में स्थापित करनी चाहिए। विघ्नेश्वर गणेश ऑफिस और दुकानों के लिए और महागणपति की स्थापना कारखानों के लिए शुभ है।

ये कहना है काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र का।गणेश उत्सव के मौके पर हमने प्रो. द्विवेदी और डॉ. मिश्र दोनों से बात की, आइए उनके ही शब्दों में समझते हैं आपके घर, ऑफिस, दुकान या फैक्ट्री में कैसे गणपति विराजने चाहिए….

हमारा घर सोने, आराम करने और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी जगह है। घर में सुख-शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे इसलिए यहां बैठे हुए गणेश की स्थापना करनी चाहिए। ऑफिस, दुकान या फैक्ट्री में हम एक्टिव रहते हैं। यहां मेहनत की जरूरत होती है। इस वजह से यहां बैठे हुए गणपति की स्थापना करना वास्तु के हिसाब से सही नहीं है।

इसलिए इन जगहों पर हमें सजग भाव में रहने वाले यानी खड़े गणपति स्थापित करने चाहिए। इससे वर्किंग प्लेस का वातावरण भी पॉजिटिव एनर्जी से भरा रहता है और कामों में तेजी आती है।

इन तीनों जगहों पर गणपति स्थापना के लिए हमने देश के जाने-माने विद्वानों से बात की और जाना कि घर में बैठाए जाने वाले गणपति और वर्क प्लेस पर स्थापित की जाने वाली प्रतिमा कैसी होनी चाहिए।

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी बताते हैं कि घर में हथेली भर के गणेशजी स्थापित करने चाहिए। इससे सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है। वास्तु दोष भी नहीं होता। मूर्ति की साइज पूछने पर बताते हैं कि ऐसी मूर्ति 12 अंगुल यानी तकरीबन 7 से 9 इंच तक की हो तो बहुत ही अच्छा है। इससे ऊंची घर में नहीं होनी चाहिए। लेकिन मंदिरों और पंडालों में मूर्ति की उंचाई से जुड़ा कोई नियम नहीं है।

मूर्तियों से गणेश जी का रूप कैसे पहचानें

ये गणेश सुख और समृद्धि देते हैं। इनकी पूजा हर मांगलिक कामों से पहले होती है। जो हर काम का शुभ फल बढ़ा देते हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक कहते हैं। इन्हें घर में पूजना चाहिए।
ये हर काम में आने वाली रुकावटें दूर करते हैं। इनको पूजने से बिजनेस और कामकाज हमेशा चलता रहता है। लेनदेन में रुकावटें नहीं आतीं और फायदा बढ़ता है। इसलिए इन्हें ऑफिस या दुकानों में स्थापित करना चाहिए।
इनके दस हाथ, दसों दिशाओं में सफलता देने के प्रतीक है। कृष्ण ने भी इसी रूप की आराधना की थी। इनको पूजने से हिम्मत, ताकत और उत्साह हमेशा बना रहता है। इसलिए इन्हें कारखानों में स्थापित करना चाहिए।

गणेश जी के तीनों रूपों की डिटेल जानकारी के लिए हमने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ डॉ. गणेश मिश्र से बात की। वो कहते हैं कि सूंड देखकर गणेश जी की मूर्ति पहचान सकते हैं। जिनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हो वो सिद्धि विनायक होते हैं। इनकी मूर्ति की डिटेल जानकारी देते हुए वास्तु शास्त्र के मयमतम ग्रंथ के हवाले से बताया कि मूर्ति लाल रंग की हो। उसमें तीन आंखें, चार हाथ और बड़ा पेट होना चाहिए।

दायां दांत टूटा और बायां वाला पूरा हो। नाग की जनेऊ पहने, जांघें मोटी और घुटने बड़े हों। दायां पैर मुड़ा हुआ, बायां नीचे की तरफ निकला हुआ रहे। एक हाथ आशीर्वाद देते हुए और दूसरे में अंकुश (हथियार) हो। एक हाथ में मोदक और दूसरे में रुद्राक्ष की माला हो। सिर पर मुकुट, गले में हार पहने बैठी हुई मूर्ति होना चाहिए।

वर्क प्लेस पर किस तरह की मूर्ति होनी चाहिए, इस पर कहा कि दाईं तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणपति विघ्नेश्वर होते हैं। इन्हें ही दुकान और ऑफिस में स्थापित करना चाहिए। इनकी मूर्ति पीले रंग की होती है। काली आंखें, कान चेहरे के हिसाब से बड़े, सिर पर मुकुट और चौड़ा ललाट जिस पर तिलक लगा हुआ होना चाहिए। बड़ा पेट और नाग की जनेऊ पहनी हो। ऐसी आठ हाथों वाली मूर्ति हो। एक हाथ आशीर्वाद देते हुए और बाकी में कमल, अंकुश, ग्रंथ, शंख, धनुष, पाश, मोदक रहे। इस तरह खड़े हुए गणेश जी होना चाहिए

कारखानों में मूर्ति स्थापना के लिए महागणपति शुभ रहते हैं। इनकी मूर्ति का रंग लाल या धुंए की तरह स्लेटी हो सकता है। एक दांत हो, सूंड़ दाईं तरफ मुड़ी हुई हो। तीन आंखें, बड़ा पेट और नाग की जनेऊ पहनी हो। जिसके दस हाथ होने चाहिए। इनमें कमल, अंकुश, ग्रंथ, चक्र, मोदक, शंख, पाश, धनुष, त्रिशूल हो और एक हाथ आशीर्वाद देते हुए होना चाहिए।

पूर्व या उत्तर दिशा में हो स्थापना
पूर्व, उत्तर या ईशान कोण में ( उत्तर-पूर्व के बीच ) मूर्ति रखनी चाहिए। इसके अलावा ब्रह्म स्थान यानी घर के बीच में खाली जगह पर गणेश जी स्थापित करें। बेडरूम में मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। सीढ़ियों के नीचे और बाथरुम के नजदीक भी गणेश स्थापना करने से बचना चाहिए।

पार्वती ने मिट्टी से ही बनाए थे गणेश
प्रो. द्विवेदी और डॉ. मिश्र मिट्टी के गणेश को ही सबसे अच्छा मानते हैं। इसके लिए कहते हैं कि मिट्टी में स्वाभाविक पवित्रता होती है। इससे बनी मूर्ति में भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश के अंश मौजूद होते हैं। यानी ये पंचतत्वों से बनी होती है। गणेश जी के जन्म की कथा में भी ये ही बताया है कि देवी पार्वती ने पुत्र की इच्छा से मिट्टी का ही पुतला बनाया था, फिर शिवजी ने उसमें प्राण डाले। वो ही गणेश बने।

पवित्र नदी, शमी या पीपल के जड़ की मिट्टी इस्तेमाल करें
पुराणों के हवाले से बताया कि शमी या पीपल के जड़ की मिट्टी से बनी मूर्ति शुभ होती है। इसके अलावा गंगा या दूसरी पवित्र नदियों की मिट्टी से भी मूर्ति बना सकते हैं। इसके लिए बस इतना ध्यान रखना होगा कि जहां से भी मिट्‌टी लें, वहां ऊपर से चार अंगुल हटाकर, अंदर की मिट्टी से भगवान गणेश की मूर्ति बनानी चाहिए।

नारियल, हल्दी और सुपारी समेत दस तरह के गणेश
मिट्टी के अलावा गाय के गोबर, सुपारी, सफेद मदार की जड़, नारियल, हल्दी, चांदी, पीतल, तांबा, स्फटिक और कुछ पूजनीय पेड़ों की लकड़ियों से बनी मूर्तियों की भी स्थापना कर सकते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि सबसे ज्यादा मान्यता मिट्टी और सुपारी से बने गणेश की ही है। इनको पूजने से मनोकामना जल्दी पूरी होती है।

 

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