Jorhat

JORHAT : अरुणाचल के आखिरी छोर विजयनगर तक बाइक राइड कर सोशल मीडिया पर छाए सुनील करनानी

साथी आकिब के साथ पूरा किया असंभव सफर, आज़ादी के 75 सालों में पहली बार हुआ कारनामा

2022 अक्टूबर 13 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो,जोरहाट :

जोरहाट के दो युवकों ने अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम और आखिरी छोर विजयनगर तक का जोखिम भरा सफर तय कर बाइक राइडिंग में नया इतिहास रचा। शहर के युवा सुनील करनानी अपने साथी राइडर आकिब अली (देबरापार) के साथ जोरहाट से अपनी बाइक पर सवार होकर इस दुर्गम सफर पर निकल पड़े। सुनील नार्थ ईस्ट राइडर्स मीट (रॉयल एनफील्ड) के संस्थापक सदस्य भी है। सुनील और आकिब ने विजयनगर पहुंच कर स्थानीय प्रशासन व लोगों को हतप्रभ कर दिया। गांधी जयंती पर विजयनगर पर कदम रखने वाले इन दोनों राइडर का वहां गर्मजोशी से अभिनंदन किया गया।

इससे पहले रास्ते में चांगलांग जिला उपायुक्त सनी सिंह ने दोनों के साथ लंच किया और सफर के लिए शुभकामना दी। विजयनगर अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के मिआओ महकमे के अंतर्गत एक कस्बा है। तीन दिशाओं से यह म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा से घिरा है। हालांकि यह मिआओ से केवल 157 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन सड़क मार्ग व यातायात की सुविधा न होने के चलते यह इलाका देश के अन्य हिस्सों से कटा हुआ है। हवाई मार्ग से हेलीकॉप्टर का जरिया अगर छोड़ दें तो यहां पहुंचने का रास्ता पैदल ही तय करना पड़ता है। इसमें सात से दस दिन का समय लगता है

दुर्गम पहाड़ी व घने जंगलों से घिरे इस इलाके में भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। जान की बाज़ी लगाकर जोखिम भरे सफर पर निकले करनानी ने अपनी यात्रा की चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा कि छह जगह उन्हें लैंडस्लाइड का सामना करना पड़ा। वहीं जहरीले सांपों व जंगली जानवरों का खतरा भी बना हुआ था।

कीचड़ सने रास्ते से बाइक निकालना यहां टेढ़ी खीर है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के जुनून ने सभी ख़तरों को पीछे छोड़ दिया। विजयनगर के इस सफर को दुर्गा पूजा की छुट्टी में पूरा कर छह दिनों बाद वे घर लौटे। आजादी के 75 सालों के इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई बाइक सवार यहां पहुंचा है। सोशल मीडिया पर सुनील और आकिब के इस अभियान के बारे में भाजपा नेता विजय सोनम वली ने ट्वीट करते हुए कहा कि उनका यह सफर दूसरे राइडर्स को यहां आने के लिए प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी इस अभियान से खुश नजर आए। शहर के देवाल रोड निवासी व व्यवसायी सुशील करनानी के पुत्र सुनील का कहना है कि खतरे जीवन में पग-पग पर है। लेकिन अगर आपने उनसे निपटना सीख लिया तो एक नई मंज़िल आपका इंतज़ार कर रही होगी।

Related Articles

Back to top button