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सिटीजनशिप एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- असम को इससे अलग क्यों रखा गया?

2023 दिसम्बर 07 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो :

मुख्य न्यायाधीश ने एक संविधान पीठ का नेतृत्व करते हुए केंद्र से पूछा, ‘आपने असम को क्यों अलग कर दिया क्योंकि कल ही हमें पता चला कि पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ बहुत बड़ी सीमा साझा करता है?

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6A की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने केंद्र सरकार से पूछा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए के आवेदन में ‘असम को अलग क्यों रखा गया’ जबकि पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ एक बड़ी सीमा साझा करता है.

मुख्य न्यायाधीश ने एक संविधान पीठ का नेतृत्व करते हुए केंद्र से पूछा, ‘आपने असम को क्यों अलग कर दिया क्योंकि कल ही हमें पता चला कि पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ बहुत बड़ी सीमा साझा करता है? इसलिए, संभवतः पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से अवैध रूप से आने वाले लोगों का मुद्दा उतना ही या उससे भी अधिक महत्वपूर्ण होगा. क्या आपके पास यह बताने के लिए कोई ठोस डेटा उपलब्ध है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या असम की तुलना में कम थी, जिसके लिए आपने इसे अकेला छोड़ दिया.’

सीजेआई ने पूछा कि असम में कितने फॉरेन ट्रिब्यूनल हैं?

अदालत ने केंद्र सरकार से एक अपडेट एफिडेविट भी मांगा है जिसमें बांग्लादेश के साथ भारतीय सीमा ‘अभेद्य’ है यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी. इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 1985 का असम अकॉर्ड और उसके बाद आने वाली नई नागरिकता व्यवस्था राजीव गांधी सरकार द्वारा पूर्वोत्तर में चल रहे अप्रवासी विरोधी हिंसक विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के लिए किया गया एक ‘समायोजन’ हो सकता है. इन हिंसक प्रदर्शनों के चलते वर्षों तक राज्य और राष्ट्रीय शांति को खतरा बना रहा.

सीजेआई ने पूछा कि असम में कितने फॉरेन ट्रिब्यूनल हैं? उन ट्रिब्यूनल के सामने कितने मामले लंबित हैं? केंद्र सरकार को बताना है कि एक जनवरी 1966 से पहले असम आने वाले कितने प्रवासियों को भारत की नागरिकता मिल पाई है? साथ ही जनवरी 1966 से 1971 के बीच बाग्लादेश से असम आने वाले कितने प्रवासियों को अब तक भारत की नागरिकता मिल पाई है? यह भी बताना है कि 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेश से असम कितने लोग अप्रवासी बन कर आए और उनको वापस भेजने के लिए सरकार ने अभी तक क्या कदम उठाए हैं?

SC ने पूछा- सीमा सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये गए हैं
इसके अलावा CJI ने केंद्र सरकार से पूछा कि देश की सीमा की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये गए हैं? देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए बॉर्डर पर बाड़ लगाने का कितना काम पूरा हुआ है और सरकार ने इसके लिए कितना निवेश किया है? केंद्र सरकार कि ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा की इन जानकारियों के बारे में हम एक-दो दिन ने ही हलफनामा दाखिल कर देंगे. संविधान पीठ नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

धारा 6ए असमिया संस्कृति, विरासत, भाषाई और सामाजिक पहचान को संरक्षित करने के लिए तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा असम आंदोलन के नेताओं के साथ 15 अगस्त, 1985 को हस्ताक्षरित ‘असम अकॉर्ड’ नामक समझौता ज्ञापन को आगे बढ़ाने के लिए 1955 के नागरिकता अधिनियम में डाला गया एक विशेष प्रावधान है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुंदरेश, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा शामिल हैं. पीठ ने स्पष्ट किया कि उसका दायरा धारा 6ए की वैधता की जांच करने तक ही सीमित है, न कि असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की वैधानिकता की जांच तक.

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