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GST : किराएदारों को मकान किराए पर देना होगा 18% GST? जानिए क्या है हकीकत

जीएसटी काउंसिल (GST Council) की पिछले महीने बैठक हुई थी। इसमें जीएसटी नियमों में कई बदलाव किए गए थे। इनमें किराये पर जीएसटी (GST on rent) से जुड़ा नियम भी शामिल है। लेकिन इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हाउस रेंट पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा।

2022 अगस्त 26 / PRJ न्यूज़ ब्यूरो :

जीएसटी काउंसिल (GST Council) की पिछले महीने हुई बैठक में जीएसटी नियमों में कई बदलाव किए गए थे। ये बदलाव 18 जुलाई से लागू हो गए हैं। इनमें किराये पर जीएसटी (GST on rent) से जुड़ा नियम भी शामिल है। 17 जुलाई तक किराये पर जीएसटी की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन जीएसटी काउंसिल की सिफारिशों के बाद 13 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में किराए पर जीएसटी लागू हो गया है। हालांकि किराए पर टैक्स कुछ खास परिस्थितियों में ही लगेगा। लेकिन इसे लेकर भ्रम की स्थिति है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सभी किरायेदारों को हाउस रेंट पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। पीआईबी की फैक्ट चेकिंग आर्म ने आज एक ट्वीट में कहा कि इस तरह की खबरें गुमराह करने वाली हैं।

इसमें कहा गया है कि रेजिडेंशियल यूनिट पर तभी टैक्स लगेगा जब इसे किसी बिजनस एंटिटी को किराये पर दिया जाता है। इसमें साथ ही कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को पर्सनल यूज के लिए मकान किराये पर दिया जाता है तो इस पर जीएसटी नहीं लगेगा। साथ ही अगर मकान मालिक या किसी फर्म का पार्टनर रेजिडेंस को पर्सनल यूज के लिए किराये पर देता है तो उस पर भी जीएसटी नहीं लगेगा। यानी यह जीएसटी सामान्य लोगों को नहीं देना होगा बल्कि उन लोगों को देना होगा जो किराये के मकान का इस्तेमाल अपने बिजनस के काम के लिए करते हैं।

हाइलाइट्स

  • 18 जुलाई से जीएसटी नियमों में कई बदलाव हुए थे लागू
  • इनमें किराये पर जीएसटी से जुड़ा नियम भी शामिल है
  • दावा किया जा रहा है सभी किरायेदारों को जीएसटी देना होगा
  • सरकार के मुताबिक किराये पर टैक्स कुछ खास परिस्थितियों में ही लगेगा

क्या है मामला
18 जुलाई से लागू नए नियमों के तहत अगर कोई अनरजिस्टर्ड पर्सन (नौकरीपेशा आदमी या छोटा कारोबारी) अपना फ्लैट जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड पर्सन (उदाहरण के लिए कोई कंपनी) को देता है तो किराए पर जीएसटी लगेगा। रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत किराएदार को किराए पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। साथ ही उसे इसके अनुपालन से संबंधित औपचारिकताएं भी पूरी करनी होगी।

टैक्स रूल्स के तहत पर्सन का मतलब केवल इंडिविजुअल नहीं है बल्कि यह एक विस्तृत टर्म है और इसमें कंपनियों के साथ-साथ सभी लीगल एंटिटीज शामिल हैं। सैलरी पाने वाले लोगों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही सभी बिजनसमैन, प्रोफेशनल्स और बिजनस एंटिटीज को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अगर किसी सर्विस प्रोवाइडर का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये है तो उसे रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। गुड्स सप्लायर्स के लिए यह सीमा 40 लाख रुपये है। लेकिन कई मामलों में इससे कम टर्नओवर वाले लोगों ने भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया है।

इसकी वजह यह है कि इससे उनके क्लाइंट या कस्टमर सप्लाई चेन में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। सोशल मीडिया में इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि किस पर जीएसटी लगेगा और किस पर नहीं। तीन सीनेरियो में इसे समझने की कोशिश करते हैं.

सिनेरियो वन
मान लीजिए कोई बिजनस कंसल्टैंट जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड है। उसने किसी अनरजिस्टर्ड पर्सन से अपने और अपने परिवार के लिए फ्लैट किराए पर लिया है। एक सीए फर्म के फाउंडर सुनील गाबावाला के मुताबिक अगर बिजनस कंसल्टैंट अपने आईटीआर में किराए का क्लेम नहीं करता है तो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू नहीं होगा।

वर्क फ्रॉम होम के कारण इसमें भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। गाबावाला ने कहा कि अगर कोई प्रोफेशनल या गिग वर्कर जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड है और सोल प्रोपाइटर के तौर पर अपनी सेवाएं देता है तो उसे अपने नाम पर रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी किराए पर नहीं लेनी चाहिए। इससे उसे भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचने में मदद मिलेगी। अगर किराएदार जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड नहीं है तो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू नहीं होगा।

सिनेरियो टू
अगर किसी कंपनी ने अपने किसी कर्मचारी या डायरेक्टर के लिए फ्लैट किराए पर लिया है और मकान मालिक जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है। ऐसे मामले में कंपनी को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत किराए पर जीएसटी देना होगा। गाबावाला ने कहा कि अगर कर्मचारी ने मकान किराए पर लिया है और कंपनी उसके पूरे किराए का भुगतान नहीं करती है तो किराए पर जीएसटी नहीं लगेगा।

सिनेरियो तीन
अगर मकान मालिक और किराएदार दोनों जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं तो इस मामले में किराए पर टैक्स का नया नियम लागू नहीं होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हाल में चंडीगढ़ में हुई जीएसटी काउंसिल की 47वीं बैठक में कई चीजों को जीएसटी के दायरे में लाने और कई चीजों पर जीएसटी की दर बढ़ाने का फैसला किया गया था।

प्रीपैकेज्ड और लेबल्ड अनाज, दाल और आटे को पहली बार जीएसटी के दायरे में लाया गया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि खुले में इनकी बिक्री पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।

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