West Bengal

WEST BENGAL : बंगाल के गांवों में चार में से तीन परिवार अभी भी जलावन पर निर्भर, केंद्र सरकार के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा

2023 मार्च 13  / PRJ न्यूज़ ब्यूरो:
रसोई गैस तो दूर की बात है। बंगाल के गांवों में चार में से तीन परिवार अभी भी खाना बनाने के लिए जलाऊ लकड़ी सूखी टहनियों या पुआल पर निर्भर हैं। शहरी क्षेत्रों में लगभग 76 प्रतिशत परिवार रसोई गैस सिलेंडर का उपयोग करते हैं।

रसोई गैस तो दूर की बात है। बंगाल के गांवों में चार में से तीन परिवार अभी भी खाना बनाने के लिए जलाऊ लकड़ी, सूखी टहनियों या पुआल पर निर्भर हैं। शहरी क्षेत्रों में लगभग 76 प्रतिशत परिवार रसोई गैस सिलेंडर का उपयोग करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करीब सात साल पहले उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन मुहैया कराना था। केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में कहा गया है कि उज्ज्वला योजना के सात साल बाद भी देश भर में आधे से भी कम ग्रामीण परिवार रसोई गैस से खाना बना रहे हैं।

केंद्र सरकार का सर्वे भी कहता है कि देश में 89 प्रतिशत शहरी परिवार रसोई गैस का उपयोग करते हैं, लेकिन केवल 49.4 प्रतिशत ग्रामीण परिवार रसोई गैस का उपयोग करते हैं। 46.7 प्रतिशत परिवार लकड़ी, सूखी लकड़ी, पुआल का इस्तेमाल करते हैं। बंगाल में तस्वीर और भी भयावह है। गांव में 76 प्रतिशत परिवार लकड़ी, सूखी टहनियां या पुआल जलाकर खाना बनाते हैं।

मालूम हो कि केवल 21 प्रतिशत परिवार रसोई गैस का उपयोग करते हैं। इस पैमाने पर केवल छत्तीसगढ़ बंगाल से भी बदतर है। छत्तीसगढ़ में 84 प्रतिशत से ज्यादा परिवा र लकड़ी पर खाना बनाते हैं। इस मामले में बिहार, झारखंड जैसे राज्य भी बंगाल से बेहतर स्थिति में हैं। हालाकि, पड़ोसी राज्य ओडिशा, बंगाल के समान स्थान पर है।

इस लिए है बंगाल की स्थिति अन्य राज्यों से खराब

राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा कि बंगाल में कोलकाता को छोडक़र ग्रामीण लोगों की प्रति व्यक्ति आय पहले से ही कम है। कोविड से राज्य में गरीब परिवारों को आमदनी का नुकसान होने से ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा देखा जा रहा है कि बंगाल में महंगाई में बढ़ोतरी की दर अन्य राज्यों से ज्यादा है। खासकर गांवों में। नतीजतन, गांव में गरीब लोगों के परिवार को चलाना और भी मुश्किल हो गया है। महंगे एलपीजी सिलेंडर छोडक़र लकड़ी जलाकर उन्हें खाना बनाना पड़ रहा है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसके परिणामस्वरूप एक और समस्या भी बढ़ रही है। यानी लकड़ी पर खाना बनाने के लिए महिलाओं को इसे लेने के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है। नतीजतन घर का काम निपटाने के बाद अतिरिक्त आमदनी का समय कम होता जा रहा है। यह प्रति व्यक्ति आय को कम करता है।

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