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सोना क्यों होता है इतना महंगा, कहलाता है रुपये की रीढ़, आम हो या खास मुसीबत में सब करते हैं याद

2023 मई 25/ PRJ न्यूज़ ब्यूरो:
सोने को इतनी तव्ज्जो इसलिए दी जाती है क्योंकि यह लंबे समय तक चलने वाला धातु है. इसकी अपनी स्टोर वैल्यू है. यह काफी मुश्किल से निकाला जाता है जो इसे और कीमती बना देता है.

सोना भारत में शादी-ब्याह का अभिन्न अंग है. दक्षिण भारत में तो शादियों में लोग सोने से लदे होते हैं. गोल्ड को स्टेट्स सिंबल की तरह देखा जाता है. केवल इतना ही नहीं, इसकी लगातार बढ़ती वैल्यू के कारण इसे निवेश के लिए भी सबसे बेहतरीन निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है. आर्थिक संकट के समय सोना और जमीन ही 2 ऐसी चीजे हैं जो हमारी मदद करती हैं. जमीन कीमती क्यों है यह समझना आसान है तो हम उस पर बात नहीं करेंगे. लेकिन सोना की वैल्यू इतनी ज्यादा कैसे हो गई ये एक बड़ा सवाल है जो कई लोगों के मन में कौंधता होगा.

सोना के महंगे होने के एक नहीं कई कारण हैं. जैसे कि सोना ताकत, राजशाही और संपत्ति का प्रतीक है. सोने का इस्तेमाल भारत में कई सौ साल पहले से दिखाई देता है. यह समय की कसौटी पर खरा उतरते हुए यहां तक पहुंचा है और आज भी उतना ही या उससे भी ज्यादा कीमती है जितना सैकड़ों साल पहले हुआ करता था. सोने को व्यापारिक लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. यानी यह दुनियाभर के कई देशों की करेंसी भी रह चुका है. यह सब इसलिए क्योंकि इसका कई जगह इस्तेमाल किया जा सकता है.

तो इसलिए कीमती है सोना
अगर आज भी करेंसी बंद होती है तो सोने को ही मुद्रा के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. यही कारण है कि विभिन्न देशों के रिजर्व में हमेशा सोना रखा जाता है. सोने को गिरवी रखकर देश लोन ले सकते हैं. सोने को इतनी तव्ज्जो इसलिए दी जाती है क्योंकि यह लंबे समय तक चलने वाला धातु है. इसकी अपनी स्टोर वैल्यू है. यह काफी मुश्किल से निकाला जाता है जो इसे और कीमती बना देता है.

और भी हैं खासियतें
सोने को आप पिघला कर किसी भी रूप में ढाल सकते हैं. ये हाई ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स, डेन्टिस्ट्री, मेडिकल, डिफेंस और एयरोस्पेस के उपकरण बनाने में काम आता है. इसका इस्तेमाल ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में भी किया जाता है. सोना देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है जो इसे गहने के रूप में एक पसंदीदा धातु बनाता है. इस पर कभी जंग भी नहीं लगती है तो यह सालों-साल चलता रहता है. खाने में सोने की परत का इस्तेमाल किया जाता है.

करेंसी के रीढ़ की हड्डी
आरबीआई मिनिमम रिजर्व सिस्टम पर नोट की छपाई करता है. इस रिजर्व में आरबीआई के पास 200 करोड़ रुपये होने चाहिए तभी वह नए नोट छाप पाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिजर्व में 200 करोड़ रुपये केवल कैश नहीं होते. बल्कि इसका अधिकांश हिस्सा गोल्ड होता है. 200 करोड़ के रिजर्व में 115 करोड़ रुपये का गोल्ड होता है और बाकी फॉरेन करेंसी होती है. इसी रिजर्व के बल पर रिजर्व बैंक के गवर्नर धारक को मूल्य अदा करने का वचन देते हैं.

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